जंगलों को बचाने आदिवासी ग्रामीणों ने की 300 किलोमीटर की पदयात्रा

 By आदिवासी युवा


जंगलों को बचाने आदिवासी ग्रामीणों ने की 300 किलोमीटर की पदयात्रा


रायपुर
, 13 अक्टूबर छत्तीसगढ़ के उत्तर क्षेत्र में मौजूद हसदेव जंगलों को बचाने के लिए सैकड़ों की संख्या में आदिवासी 10 दिनों में तीन सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा करके बुधवार को रायपुर पहुंचे।  आदिवासियों  ने हसदेव अरण्य क्षेत्र की कोयला खनन परियोजनाओं को निरस्त करने तथा पेसा कानून लागू करने की मांग की है।


जंगलों को बचाने आदिवासी ग्रामीणों ने की 300 किलोमीटर की पदयात्रा


हसदेव बचाओ संघर्ष समिति
के सदस्य आलोक शुक्ला ने बुधवार
को यह बताया कि हसदेव अरण्य क्षेत्र को बचाने और ग्राम सभाओं के अधिकारों के हनन के खिलाफ न्याय की गुहार लगाने के लिए लगभग 350 की संख्या में आदिवासीयों ने  300 किलोमीटर की पदयात्रा करके आज रायपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं।


जंगलों को बचाने आदिवासी ग्रामीणों ने की 300 किलोमीटर की पदयात्रा


 शुक्ला ने बताया कि पिछले एक दशक से हसदेव अरण्य को बचाने के लिए वहां निवासरत गोंड, उरांव, पंडो और कंवर आदिवासी समुदाय संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि यहां के ग्राम सभाओं ने क्षेत्र में कोयला खनन परियोजनाओं का विरोध किया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा, "क्षेत्र में खनन परियोजनाओं के आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों को उजागर करते हुए आदिवासियों ने कई पत्र लिखे तथा जिम्मेदार लोगों से मिलने का लगातार प्रयास किया।

 

आदिवासी यहां लगातार अपने जल-जंगल-ज़मीन तथा उसपर निर्भर जीवन-यापन, आजीविका और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन जन विरोध के बावजूद क्षेत्र में खनन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।"

 

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने तथा हसदेव-अरण्य क्षेत्र को बचाने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीणों ने दो अक्टूबर गांधी जंयती के दिन सरगुजा जिले के फतेपुर गांव से पदयात्रा की शुरूआत की थी जो 10 दिन बाद आज रायपुर पहुंची।

 

राजधानी में पदयात्रा के पहुंचने के बाद राज्य भर से आए कई अन्य समाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने प्रदयात्रियों से मिलकर आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को हसदेव अरण्य से आए आदिवासी रायपुर के बूढ़ा-तालाब के करीब धरना प्रदर्शन और सम्मेलन आयोजित करेंगे।

 

उन्होंने बताया कि आदिवासियों ने मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अनुसूइया ऊईके ने पदयात्रियों के एक दल से संवाद का समय दिया है।

 

छत्तीसगढ़ के सरगुजा और कोरबा जिले में स्थित हसदेव अरण्य वन क्षेत्र मध्य भारत के सबसे समृद्ध, जैव विविधता से परिपूर्ण वन-क्षेत्रों में गिना जाता है।

 

पद यात्रा के रायपुर पहुंचने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और अंबिकापुर क्षेत्र के विधायक टी एस सिंहदेव ने पदयात्रियों से मुलकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "मैं  आदिवासियों  की राय से सहमति रखता हूं। शासन के स्तर पर जब बात होगी तब मै इनकी ओर से पहल करूंगा।



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