By आदिवासी युवा
संसू, झारसुगुडा : ऑल इंडिया गोनावाना गोंड महासभा ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाइक की अध्यक्षता में झारसुगुड़ा के कापूमाल स्थित गोंड भवन में बैठक आयोजित की गई। महासभा की ओर से बताया गया कि मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन के तहत एक भी मांग पूरी नहीं की गई।
इससे आदिवासी समाज में नाराजगी है। आदिवासियों की मुख्य मांगें राज्य जनजातीय आयोग का गठन, पेसा अधिनियम का अधिनियमन, लैयकरा, किरमिरा और जोजुमुरा के लिए अनुसूचित ब्लॉक का दर्जा, कोलाबीरा जमींदार करुणाकर सिंह नाइक, भाई खग नाइक और उनके बेटे को शहीद की मान्यता, कोलाबीरा गढ़ की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री की ओर से घोषित 50 लाख अनुदान का भुगतान करने की मांग की गई। संविधान के अनुसार, एसटी, एससी विभाग के कैबिनेट मंत्री ने यह नहीं कहा कि आदिवासी ही होना चाहिए।
पिछले दो वर्षों में आदिवासी निर्वाचन क्षेत्रों से 33 प्रतिशत आदिवासी विभिन्न दलों से विधायक चुने गए हैं। वे विधायिका के तहत कार्य नहीं कर रहे हैं। उन्हें जो स्वदेशी लगता है, उन्हें स्वदेशी लोगों के अधिकार के बारे में जागरूक होना चाहिए। ओडिशा में एक करोड़ से अधिक आदिवासियों को उपेक्षित, उत्पीड़ित और लूटा गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि समाधान को पहली बार संवैधानिक तरीके से विधायिका के सामने पेश किया जाना है।
विभिन्न दलों का नेतृत्व आदिवासियों के हाथ में नहीं है, तो आदिवासियों का मुद्दा कौन उठाएगा आदिवासी किस दिशा में आकर देश की मुख्यधारा में शामिल होंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि आदिवासी मंदिर छोड़कर संविधान के अनुसार विधान सभा में प्रवेश करेंगे और आदिवासियों को प्राथमिकता के आधार पर आदिवासी प्रतिनिधियों के रूप में प्रतिनिधित्व करने के लिए राजी करेंगे। एक आदिवासी राजनीतिक दल के तहत राज्य स्तर पर खड़ा होने की कसम खाई है।
बैठक में महासचिव प्यारी मोहन नायक, चूड़ामणि धुरुआ, जिलाध्यक्ष श्यामसुंदर भोई, बलांगीर, प्रसन्ना मांझी नुआपाड़ा, भागीरथी सिंह बरगढ़, प्रेमानंद मांझी खोरधा, डमरुधर नायक झारसुगुड़ा, विष्णुचरण प्रधान कंधमाल, बिरज भोई सुमन, महेंद्र गडनायक, सदाशिव नायक, अनुकूल, उग्रेशन नायक केंदुझार, श्यामलाल नाइक, फकीर नाइक, कृष्णचंद्र वोई, मुरारी वोई, रवींद्र प्रधान उपस्थित थे।

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