"आदिवासी बोलने लगा, आदिवासी एकता परिषद एक वैचारिक आंदोलन "

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आदिवासी एकता परिषद 
आप. सुनिल गायकवाड 
राज्यसंपर्क प्रमुख महाराष्ट्र 
9843698289


विषय: भारत में आदिवासीयो का आत्मसम्मान का आंदोलन और मानव मुक्ति कि लढाई...

भाग 4


ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ खाज्या नाईक, भिमा नाईक, तंट्या भिल, भागोजी नाईक, बिरसा मुंडा, राघोजी भांगरे जैसे आदिवासी विरोंने इस लढाई का नेतृत्व किया। यह एक संघटित लढाई थी। और उसके पीछे आदिवासी यों का सांस्कृतिक अस्तित्व को बरकरार रखने का उद्देश्य था।

हम आदिवासी यों को गौरवान्वित करने का यह आंदोलन था फिर भी यह  इतिहास तथा कथित इतिहासकारोने दुनिया से छिपाया।आदिवासीयों का आत्मसम्मान बढे ऐसी बातो को जानबुज कर समाज के सामने नही लाया गया। जिससे अपनी सत्ता और सामाजिक वर्चस्व कायम रहना चाहिये। यह प्रस्थापितो की मंशा जाहिर होती है। 

आज भी सातपुडा के परिसर मे आंबापानी कि लढाई मे और भागोजी नाईक को पकडने के लिये चलाई गयी मोहिम मे मारे गये कॅप्टन हेनरी का स्मारक जो "नांदुर शिंगोटी" गाव के जंगल मे खडा है। यह आदिवासीयो का स्वाभिमान का सबूत देता है।

इस तरह से मुर्शिदाबाद, वाशिम बाजार, मालदा हुगडीगड जैसे इलाको मे बागी आदिवासी यों ने बिदनापूर मे खेरा, माझी चुडा आदिवासियो ने 1617 से 1667 तक मुघल बादशाहा, इस्ट इंडिया कंपनी के दलाल और जमिनदारो के जुल्म के खिलाप संघटीत होकर लढाई कि। इस बारे मे जेसि प्राईज इस अंग्रेंज ने मिदनापुर का कोई भी इलाका आदिसियोके बगावत से नही बचा है। ऐसा लिखा है। सिंगभुम चाईबासा के इलाके के मेजर रकरेज ने 1823 से 1827 के दरमियान आदिवासी यो को उन की इच्छा नुसार व्यवहार करने के लिये जबरदस्ती की लेकिन वहा के आदिवासियो के संघटीत विरोध के वजह से वहा कि मुंडामान आदिवासी योंकि रितारिवाज और प्रशासनिक व्यवस्था को मान्यता देनी पडी। 

संथाल परगना गॅजेटियर मे स्वायत्त संथाल परगना स्थापन करने कि मांग है, वहा के कोलकाता अभियान में 1200 ब्रिटिश अधिकारियो के गुम होने कि नोंद है। भागलपुर चुरकुम परिसर मे 1855 से 1857 के काल मे सरेआम लढाई या हुवी है वहा 261 आदिवासी लोगो को बंदी बनाया गया था।  उसमे 46 लोग 10 साल के उम्र के थे। संथाल परागना मे वहा के आदिवासी यों ने ब्रिटिश सरकार को कुल-कायदा लागू करने के लिए मजबुर कर दिया था। यह सिर्फ बगावत नही थी, यह आदिवासी यों का आत्मसम्मान का अंदोलन था

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